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जान देंगे जमीन नहीं देंगे पर अड़े चिल्हों खुर्द के आदिवासी

गलत तरीके से स्टोन माइंस दिए जाने का कर रहे हैं विरोध, राजद नेताओं का भी मिला समर्थन 

जान देंगे जमीन नहीं देंगे पर अड़े चिल्हों खुर्द के आदिवासी

निरंजन सिन्हा 

छतरपुर :

पलामू ज़िले के छतरपुर प्रखंड के हुल्सम पंचायत अंतर्गत चिलहों खुर्द गांव के सैकड़ों आदिवासी परिवारों ने स्टोन माइंस के लिए गांव की जमीन नहीं देने के लिए कमर कस ली है। इस मुद्दे पर गांव के सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने रविवार को आयोजित बैठक में भाग लिया। बैठक में ग्रामीणों ने नारा लगाया कि जान देंगे जमीन नहीं देंगे, क्योंकि जमीन ही हमारी माता है और रोजी रोजगार ,जीने खाने का एकमात्र जरिया भी।

बता दें कि इस गांव में खरवार और चेरो जनजाति की बहुलता है। यहां के नब्बे फीसदी लोगों का मुख्य पेशा किसानी है।साथ ही लीज के पहाड़ के बगल में आदिवासियों के पारम्परिक देवता का पूजा स्थल है। वहीं पर देवी मंडप भी है। 

ग्रामीणों ने बताया कि गांव की करीब तीन एकड़ गैर मजरूआ पहाड़ी जमीन को पत्थर तोड़ने के लिए छतरपुर के मुकेश सिंह व रेहला के अशोक सिंह के नाम पर 2017 में लीज करवाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके अनपढ़ होने का फायदा उठा तीन वर्षो पहले गांव में कहीं और क्रेशर खोलने के नाम पर सादे पेपर पर घर घर जा सब के दस्तखत और ठेपा ले लिए गए और बाद में इसे ग्राम सभा का नाम दे दिया गया।
बाद में जब क्षेत्र का सीमांकन होने लगा और इसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई कि जिस पर उन्होंने दस्तखत किया है वह क्रेशर नहीं माइंस है तो ग्रामीणों ने इसका जम कर विरोध किया और खनन विभाग सहित तत्कालीन उपायुक्त की आवेदन दे सारी बातो से से अवगत करा इस लीज को निरस्त करने की मांग की।

ग्रामीणों ने तत्कालीन बीडीओ पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने डीसी के निर्देश पर 2018 में मामले की जांच के दौरान चार दिनों में लीज़ निरस्त करने के नाम पर उनके दस्तखत ले लिए और फिर उन्हें राजीनामा के नाम पर प्रस्तुत कर दिया। 

हालाँकि लगातार विरोध के बाद ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया था और अब तक कोई कार्य शुरू नहीं किया गया था। लेकिन पिछले हफ्ते इसी माह की 20 तारीख को उक्त भूमि का सीमांकन कराये जाने की नोटिस मिलते ही लोगो ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक व पूर्व सांसद से भी मिले।

लीज भूमि के चौहड़ीदार मुकेश सिंह ने उक्त जमीन पर लीज के बाद भी चार नामित व्यक्तियों के द्वारा रंगदारी की मांग करने के कारण पिछले दो वर्षो से कोई कार्य नहीं किए जाने की बात बताई। उन्होंने बताया कि हाल में ही उन्हें तीन एकड़ भूमि के रेंट के रूप में एक लाख पचासी हजार रूपये सरकारी खाता में जमा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर कोई कार्य नहीं किया गया है। मैं डीसी को आवेदन देकर भूमि का सीमांकन करा कार्य चालू करने की आदेश देने या तो फिर लीज निरस्त करने की मांग की है। इसी पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने 20 तारीख को सीमांकन तय किया है। 

जान देंगे जमीन नहीं देंगे पर अड़े चिल्हों खुर्द के आदिवासी



इस सम्बन्ध में पूछे जाने पर छतरपुर के सीओ राकेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि के लीज की अनुमति हमारे द्वारा नहीं दी गई है। उनके द्वारा आवेदन पर सिर्फ सीमांकन का समय दिया गया है। यदि ग्रामीणों का विरोध है तो वे संबंधित कार्यालय जहां से लीज ग्रांट हुआ है वहां इसे निरस्त करने का आवेदन दें।

उधर राजद नेता भी ग्रामीणों की मांगों के समर्थन में मैदान में कूद चुके हैं। छतरपुर विधानसभा के से राजद प्रत्याशी रहे विजय राम ने कहा कि महगठबंधन की सरकार में किसी के साथ नहीं होगा अन्याय, आदिवासियों के अधिकारों का हनन ना हो ये सरकार की पहली प्राथमिकता । क्षेत्र में इस तरह से सभी फर्जी लीज माइंस मामले की निष्पक्ष जांच करा दोषी पर करवाई कराने की मांग मुख्यमंत्री से कि जाएगी। 

उधर पलामू के पूर्व सांसद घूरन राम ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है यदि ऐसा हुआ है तो यह काफी गंभीर मामला है और इस पर उच्च स्तरीय जांच करा क्षेत्र के आदिवासियों को न्याय दिलाने हेतु मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा। 

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